संबित पात्रा का कांग्रेस पर हमला, बोले- नेहरू के समय हुई थी पहली वोट चोरी

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डेस्क :  देश में वोट चोरी और चुनाव प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता एवं सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष की ओर से आयोजित मॉक संसद पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में वोट चोरी की शुरुआत आज नहीं, बल्कि आजादी के समय हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के पहले प्रधानमंत्री के चयन के दौरान पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सरदार वल्लभभाई पटेल को पीछे छोड़कर प्रधानमंत्री पद हासिल किया था।

संबित पात्रा ने कांग्रेस पर लगाए आरोप

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर संबित पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में पहली बार वोट चोरी की घटना कांग्रेस के नेतृत्व चयन के दौरान हुई थी। उनके अनुसार, उस समय कांग्रेस के अधिकांश प्रांतीय नेताओं ने सरदार पटेल के नाम का समर्थन किया था, लेकिन महात्मा गांधी के हस्तक्षेप के बाद पटेल ने अपना नाम वापस ले लिया और जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष बने।

पात्रा ने इसे सरदार पटेल के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि कांग्रेस आज जिस वोट चोरी का मुद्दा उठा रही है, उसे अपने राजनीतिक इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए।

1946 में क्या हुआ था?

दरअसल, यह विवाद वर्ष 1946 में कांग्रेस अध्यक्ष के चयन से जुड़ा है। उस समय कांग्रेस अध्यक्ष का पद बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि ब्रिटिश शासन के अंतिम दौर में अध्यक्ष को अंतरिम सरकार का नेतृत्व मिलने की संभावना थी।

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, 15 प्रांतीय कांग्रेस समितियों में से 12 ने सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम का समर्थन किया था। शेष समितियों ने भी नेहरू का नाम प्रस्तावित नहीं किया था। बाद में महात्मा गांधी के आग्रह पर पटेल ने अपना नाम वापस ले लिया और नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष बने।

हालांकि, इस प्रक्रिया में औपचारिक मतदान नहीं हुआ था। इसलिए इसे सीधे तौर पर चुनावी वोट चोरी कहना राजनीतिक आरोप है, न कि उस प्रक्रिया का निर्विवाद ऐतिहासिक निष्कर्ष।

मॉक संसद को लेकर विपक्ष पर निशाना

संबित पात्रा ने विपक्ष की ओर से आयोजित मॉक संसद पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष वास्तविक संसद में जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने के बजाय हंगामा करता है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने वाले नेता अक्सर सदन से अनुपस्थित रहते हैं।

13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटने के आरोप पर भी जवाब

विपक्ष की ओर से मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के दावे पर भी पात्रा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि इतने बड़े पैमाने पर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए गए होते, तो देशभर में व्यापक विरोध देखने को मिलता।

उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी कई बार ऐसी प्रक्रिया अपनाई गई थी। पात्रा ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में केवल भारतीय नागरिकों के नाम होने चाहिए और जिन लोगों का नाम सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।

इस तरह वोट चोरी का मुद्दा एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है।