‘संसद में चर्चा नहीं, सिर्फ विधेयक पास’, चिदंबरम का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला

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डेस्क : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने संसद की कार्यवाही को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही और सरकार बिना सार्थक बहस के विधेयक पारित करा रही है। चिदंबरम ने यहां तक कहा कि मौजूदा हालात को देखकर उन्हें कभी-कभी सांसद के बजाय विधायक होना बेहतर लगता है।

कांग्रेस की एक बैठक को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वहां की बहस उन्हें संसद की तुलना में अधिक सार्थक लगी। उनके मुताबिक, संसद में लगातार हो रहे स्थगन के कारण कई अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है।

छात्र आंदोलन पर चर्चा नहीं होने का मुद्दा उठाया

चिदंबरम ने दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा नहीं हो सकी। कांग्रेस नेता ने पुलिस कार्रवाई और एक छात्र की आंख की रोशनी जाने की घटना का हवाला देते हुए सरकार पर सवाल उठाए।

उन्होंने मॉनसून सत्र में कई विधेयकों के पारित होने को लेकर भी सरकार को घेरा। चिदंबरम का आरोप है कि विधेयकों को पर्याप्त चर्चा के बिना पारित किया जा रहा है, जिससे संसद की भूमिका और गरिमा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

FCRA संशोधन पर भी सरकार को घेरा

FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन कानून में प्रस्तावित बदलावों को लेकर भी चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि इन संशोधनों का असर सामाजिक कार्यों के लिए विदेश से चंदा प्राप्त करने वाले संगठनों पर पड़ेगा।

चिदंबरम ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बदलावों का इस्तेमाल ईसाई और मुस्लिम संगठनों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने लंबे समय से समाज सेवा में योगदान दिया है और नए प्रावधानों से उनके काम पर असर पड़ सकता है।

परिसीमन पर कांग्रेस का विरोध

चिदंबरम इससे पहले भी प्रस्तावित परिसीमन को लेकर कांग्रेस का रुख स्पष्ट कर चुके हैं। कांग्रेस का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों को परिसीमन के बाद राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान नहीं होना चाहिए। पार्टी मौजूदा लोकसभा सीटों के अनुपात को बनाए रखने की मांग कर रही है।

चिदंबरम के ताजा बयान के बाद FCRA और परिसीमन जैसे मुद्दों पर केंद्र और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।