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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से पहले राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंजूरी दे दी है कि पंचायत चुनाव संपन्न होने तक ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में सौंपी जाएगी।
इस निर्णय के बाद राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में कार्यकाल समाप्त होने या समाप्ति की ओर बढ़ने की स्थिति में अब बाहरी अधिकारियों की जगह मौजूदा ग्राम प्रधान ही प्रशासकीय कार्य संभालेंगे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पंचायती राज विभाग इस संबंध में जल्द ही विस्तृत आदेश जारी करेगा। आदेश लागू होने के बाद ग्राम पंचायतों के दैनिक प्रशासन, विकास कार्यों और स्थानीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों के पास रहेगी।
राज्य में पंचायत चुनावों में हो रही देरी के मद्देनज़र यह व्यवस्था लागू की जा रही है। बताया जा रहा है कि ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यों के चलते चुनाव समय पर नहीं हो सके हैं। ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
इस फैसले से ग्रामीण प्रशासन में निरंतरता बनाए रखने और विकास कार्यों को गति देने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी मिलने से स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया और अधिक तेज होने की संभावना है।
राज्य में हजारों ग्राम पंचायतें इस नई व्यवस्था के दायरे में आएंगी, जो तब तक लागू रहेगी जब तक नए पंचायत चुनाव संपन्न नहीं हो जाते।
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