सीमा से रिश्तों तक, डोभाल-वांग यी करेंगे भारत-चीन संबंधों पर मंथन

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नई दिल्ली : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल सोमवार को बीजिंग के लिए रवाना होंगे। मंगलवार को वह चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि (Special Representatives) स्तर की 25वें दौर की वार्ता में शामिल होंगे। दोनों देशों के राजनयिकों की इस बैठक पर लंबे समय से नजर बनी हुई है।

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के समाधान के लिए विशेष प्रतिनिधि तंत्र की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी। दोनों देशों के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर विवाद के समाधान की दिशा में इस तंत्र के तहत अब तक 24 दौर की वार्ता हो चुकी है।

वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के कारण विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत करीब पांच वर्षों तक ठप रही। दिसंबर 2024 में बीजिंग में 23वें दौर की वार्ता के साथ बातचीत फिर शुरू हुई। इसके बाद 24वां दौर पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली में हुआ था।

पहली बार बीजिंग में एसआर वार्ता में शामिल होंगे डोभाल

2024 में बातचीत बहाल होने के बाद डोभाल पहली बार विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के लिए बीजिंग जा रहे हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

सीमा पर शांति और तनाव कम करने पर होगी चर्चा

बैठक में अक्टूबर 2024 में हुए सैन्य समझौते के बाद सीमा पर स्थिति की समीक्षा होने की उम्मीद है। चीन लगातार सीमा की स्थिति को सामान्य और स्थिर बताता रहा है। दोनों पक्ष पिछले दौर की बातचीत में बनी सहमति को लागू करने और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिरता बनाए रखने की दिशा में काम कर रहे हैं।

वार्ता में सैनिकों की तैनाती के अलावा तनाव कम करने, सीमा निर्धारण और सीमा क्षेत्रों के प्रबंधन से जुड़े व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। भारत की ओर से सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा भी उठाए जाने की संभावना है। पिछले दौर की वार्ता में भी भारत ने इस चिंता को प्रमुखता से रखा था।

हाल की बैठकों से बढ़ी बातचीत की गति

डोभाल और वांग यी की जून में नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान भी मुलाकात हुई थी। उस दौरान दोनों पक्षों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की दिशा में हुई प्रगति पर चर्चा की थी। हालांकि, वह औपचारिक विशेष प्रतिनिधि वार्ता नहीं थी। ऐसे में मंगलवार की बैठक पिछले साल अगस्त के बाद पहली औपचारिक सीमा-केंद्रित वार्ता होगी।

भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार के संकेत हवाई सेवाओं की बहाली, वीजा नियमों में ढील और कैलाश-मानसरोवर यात्रा की पुनर्बहाली के रूप में भी दिखाई दिए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हुई है तथा वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।

सितंबर में शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे पर भी नजर

विशेष प्रतिनिधि वार्ता के अलावा दोनों देशों की नजर सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर भी है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे की संभावनाओं के बीच मंगलवार की वार्ता को अहम माना जा रहा है।

अगर बीजिंग में बातचीत सकारात्मक रहती है, तो इससे भारत-चीन संबंधों में सामान्यीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आगामी उच्चस्तरीय संपर्क का रास्ता तैयार करने में मदद मिल सकती है।