जयपुर : मालवीय नगर स्थित अणुविभा केंद्र के महाप्रज्ञ सभागार में शुक्रवार को तप अनुमोदना एवं खमत-खामणा कार्यक्रम श्रद्धा और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ आयोजित किया गया। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा एवं तेरापंथ महिला मंडल (शहर) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी का सान्निध्य प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में समाज की ओर से तपस्वी श्रावक-श्राविकाओं के तप की अनुमोदना की गई। श्री शुभकरण जी नाहटा के ग्यारह एकासण तप तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शर्मिला जी नाहटा के मासखमण (एकासण) तप की अनुमोदना की गई। इसी क्रम में श्रीमती प्रिया जी बैद, पुत्रवधू श्री बाबूलाल जी बैद के 35 एकासण तप की भी समाज द्वारा अनुमोदना की गई।
इस अवसर पर लालमंदिर, जवाहर नगर से आए प्रतिनिधिमंडल ने मुनिश्री एवं उपस्थित समाजजनों से खमत-खामणा किया। जवाहर नगर जैन सभा के महामंत्री श्री नितिन जी दूगड़ तथा तेरापंथ समाज से श्री सुरेश जी बरड़िया ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में श्री संजय जी पंसारिया, श्री शरद जी मेहता, श्री दीपेश जी गोलछा, श्री राजेन्द्र जी जैन सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि व्यक्तित्व का सर्वोपरि गुण विनम्रता है। विनम्रता जीवन के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है, जबकि अहंकार व्यक्ति के पतन का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि विनम्रता वरदान है और अहंकार अभिशाप। व्यक्ति को अपने व्यवहार में मृदुता और मधुरता का विकास करना चाहिए। तन, मन और वाणी में कठोरता नहीं, बल्कि सरलता और सौम्यता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नम्रता और सरलता के बिना खमत-खामणा की भावना पूर्ण नहीं हो सकती।
मुनिश्री संभव कुमार जी ने क्षमायाचना की आंतरिक भावना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षमा मांग लेने के बाद मन में किसी प्रकार की रंजिश नहीं रहनी चाहिए। यदि व्यक्ति के मन में यह भाव बना रहे कि उसने तो क्षमा मांग ली, लेकिन सामने वाले ने नहीं मांगी, तो क्षमायाचना की भावना अधूरी रह जाती है। उन्होंने कहा कि खमत-खामणा और ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ के बाद मन-मस्तिष्क हल्का और निर्मल हो जाना चाहिए। क्षमा के बाद मन में किसी प्रकार की नकारात्मक लहर न रहे, बल्कि प्रसन्नता और शांति का अनुभव हो।
कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर पद्म प्रभु की स्तुति से हुआ। इसके बाद प्रेक्षाध्यान एवं प्रत्याख्यान के प्रयोग करवाए गए। मंगल पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
33वां विकास महोत्सव 20 सितंबर को
अणुविभा केंद्र में मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी के सान्निध्य में तेरापंथ धर्मसंघ का 33वां विकास महोत्सव 20 सितंबर 2026, रविवार को प्रातः 9:15 बजे आयोजित किया जाएगा।








