डेस्क : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर विपक्षी दलों के बीच सीटों के बंटवारे का मुद्दा गरमाने लगा है। समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन में कांग्रेस की 200 सीटों पर दावेदारी को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कांग्रेस की मांग पर तंज कसते हुए कहा कि यदि दो सीटें जीतने के आधार पर कांग्रेस 200 सीटें मांग रही है, तो 111 सीटें जीतने वाली सपा को 1000 सीटों की मांग करनी चाहिए।
कांग्रेस की मांग पर संजय सिंह का सवाल
लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पिछले विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन का हवाला देते हुए उसकी सीटों की मांग को जमीनी हकीकत से दूर बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को ऐसी मांगें रखनी चाहिए, जो व्यावहारिक हों।
संजय सिंह ने कहा कि यदि इसी आधार पर सीटों का बंटवारा किया जाएगा, तो उत्तर प्रदेश विधानसभा में सीटों की संख्या बढ़ानी पड़ेगी। उनका यह बयान विपक्षी गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आया है।
हरियाणा और महाराष्ट्र का भी किया जिक्र
संजय सिंह ने कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए हरियाणा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के बीच तालमेल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के बीच समय पर समन्वय नहीं होने से भाजपा के खिलाफ संभावित राजनीतिक लाभ प्रभावित हुआ।
उन्होंने विपक्षी दलों को आपसी खींचतान से बचने और साझा रणनीति बनाने की सलाह दी।
चुनावी मुद्दों पर भी दिया जोर
संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को धार्मिक ध्रुवीकरण के बजाय आम जनता से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने बच्चों की फीस, रोजगार, स्कूल, अस्पताल, किसानों की फसल के उचित दाम और पिछड़े, दलित तथा अल्पसंख्यक वर्गों से जुड़े सवालों को चुनावी बहस का हिस्सा बनाने की बात कही।
सीट बंटवारे पर नजरें
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। वर्ष 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस और सपा के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत और राजनीतिक दावों पर सबकी नजरें टिकी हैं। कांग्रेस अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छुक है, जबकि सपा की ओर से उम्मीदवारों की जीतने की क्षमता को महत्वपूर्ण आधार बताए जाने की खबरें सामने आई हैं।
अब देखना होगा कि दोनों दल सीटों के बंटवारे पर किस तरह सहमति बनाते हैं और विपक्षी गठबंधन चुनाव से पहले अपनी रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।









