डेस्क : टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के संसद से पारित होने के साथ ही यूपीआई लेनदेन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में लाया गया है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर यूपीआई लेनदेन पर भविष्य में टैक्स या कोई अन्य शुल्क लगेगा या नहीं।
संजय सिंह ने कहा कि यूपीआई को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं से यूपीआई भुगतान पर MDR यानी Merchant Discount Rate नहीं लिए जाने की बात कही गई है। सिंह का दावा है कि सरकार पहले समिति गठित कर व्यापारियों से लिए जाने वाले शुल्क को तय करने की बात कर चुकी है, जबकि अब अलग बयान दिया जा रहा है।
AAP सांसद ने आरोप लगाया कि भारत में यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल से वीजा और मास्टरकार्ड जैसी अंतरराष्ट्रीय भुगतान कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि UPI भुगतान नि:शुल्क होने के कारण इन कंपनियों के कारोबार में कमी आई और इसी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर UPI पर शुल्क लगाने का दबाव बनाया।
संजय सिंह ने चेतावनी दी कि यदि व्यापारियों पर किसी प्रकार का टैक्स या शुल्क लगाया जाता है तो उसका सीधा असर अंततः आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि व्यापारी किसी भी अतिरिक्त लागत को अपने कारोबार की कीमतों में शामिल कर सकते हैं और इसका बोझ जनता को उठाना पड़ सकता है।
सरकार का पलटवार, ‘अभी कोई टैक्स या चार्ज नहीं’
विपक्ष के आरोपों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि UPI से संबंधित संशोधन अपने आप में किसी तरह का टैक्स या ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगाता। उन्होंने इसे केवल एक सक्षम प्रावधान बताया, जिसके जरिए सरकार अधिसूचना के माध्यम से यह तय कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों को शुल्क से वैधानिक संरक्षण मिलता रहेगा।
सीतारमण ने यह भी कहा कि UPI लेनदेन के लिए MDR की कोई व्यवस्था अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर UPI भुगतान के लिए MDR का बोझ नहीं डाला जाएगा।
मनी बिल होने से राज्यसभा की भूमिका सीमित
टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी थी। मनी बिल होने के कारण राज्यसभा इसमें केवल सिफारिशें कर सकती है और इसे लोकसभा को वापस भेज सकती है। अंतिम निर्णय लोकसभा के पास रहता है।
विधेयक के पारित होने के बाद अब राजनीतिक बहस का केंद्र UPI पर तत्काल लगने वाला कोई शुल्क नहीं, बल्कि यह सवाल बन गया है कि भविष्य में सरकार को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क संबंधी प्रावधान लागू करने की कितनी गुंजाइश मिलेगी। विपक्ष इसे लेकर सरकार से स्पष्टता मांग रहा है, जबकि सरकार का जोर इस बात पर है कि मौजूदा प्रावधान UPI उपयोगकर्ताओं पर कोई टैक्स या ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगाता।








