‘युद्ध अभ्यास 2026’: भारत-अमेरिका सेनाओं ने साझा किया तोपखाना संचालन का अनुभव

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बीकानेर :  भारत और अमेरिका के बीच जारी संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ के तहत बुधवार को महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में दोनों देशों के सैन्यकर्मियों ने एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर (यूएलएच) की दिन के समय तैनाती पर व्याख्यान-सह-प्रदर्शन किया। इस दौरान तकनीकी और सामरिक पहलुओं के माध्यम से दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त तोपखाना संचालन, परिचालन दक्षता और मैदानी स्तर पर समन्वय को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रशिक्षण सत्र में प्रमुख सैन्य पदों की जिम्मेदारियों, तोप की तैनाती, स्थानीय रक्षा समन्वय, जवाबी गोलाबारी के दौरान वैकल्पिक स्थानों पर स्थानांतरण तथा ‘शूट एंड स्कूट’ अभ्यास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का प्रदर्शन किया गया। अभ्यास के दौरान भारतीय और अमेरिकी सैनिकों ने अपने अनुभव और बेहतर सैन्य तौर-तरीकों को भी साझा किया।

इससे पहले बुधवार को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ‘युद्ध अभ्यास’ को भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने अमेरिकी पैसिफिक कमांड की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अभ्यास संबंधी पोस्ट को दोबारा साझा करते हुए लिखा, “एक बेहतरीन साझेदारी।”

अमेरिकी पैसिफिक कमांड ने बताया कि भारत और अमेरिका की सेनाओं ने 15 सितंबर को एक समारोह के साथ ‘युद्ध अभ्यास 2026’ की शुरुआत की। दो सप्ताह तक चलने वाले इस द्विपक्षीय प्रशिक्षण का उद्देश्य सैन्य तैयारी, अंतर-संचालन क्षमता और आपसी सहयोग को मजबूत करना है।

‘युद्ध अभ्यास’ का 22वां संस्करण मंगलवार को उत्तराखंड के औली फॉरेन ट्रेनिंग नोड में शुरू हुआ। उद्घाटन अवसर पर 14 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अमरेश गुंजन और अमेरिकी सेना की 11वीं एयरबोर्न डिवीजन की पहली इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के कमांडर कर्नल बेंजामिन जैकमैन ने दोनों देशों के सैनिकों को संबोधित किया। अभ्यास में भारत और अमेरिका के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बार अभ्यास का आयोजन उत्तराखंड के औली के साथ राजस्थान स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स के संचालन के लिए दोनों सेनाओं की संयुक्त सैन्य क्षमता को बढ़ाना है। अभ्यास में पैदल सेना आधारित अभियानों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

अभ्यास के दौरान दोनों सेनाओं के बीच बेहतर अंतर-संचालन क्षमता विकसित करने, परिचालन संबंधी श्रेष्ठ प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान तथा संयुक्त योजना और अभियान संचालन को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इस संस्करण में तकनीक के इस्तेमाल को विशेष महत्व दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान निगरानी और टोही के लिए ड्रोन तथा स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। वहीं, महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

दोनों सेनाओं के विषय विशेषज्ञ उभरती सैन्य तकनीकों और बहु-क्षेत्रीय युद्धक क्षमताओं में हो रहे बदलावों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।