2027 के चुनाव से पहले यूपी कांग्रेस में विवाद, जूते-चप्पल कांड की जांच शुरू

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डेस्क : उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष के पदभार ग्रहण समारोह से पहले हुए हंगामे और जूते-चप्पल चलने की घटना ने पार्टी के भीतर अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बृजलाल खाबरी करेंगे।

समिति में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं उत्तर प्रदेश के सह-प्रभारी अब्दुल हन्नान और अभिषेक दत्त के अलावा पूर्व सांसद रवि वर्मा तथा शमीना शफीक को शामिल किया गया है। समिति घटनाक्रम की जांच कर मामले से जुड़े तथ्यों का आकलन करेगी।

पदभार समारोह से पहले भिड़े पार्टी के कार्यकर्ता

विवाद रविवार को लखनऊ स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में उस समय हुआ, जब नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा के औपचारिक पदभार ग्रहण की प्रक्रिया चल रही थी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के कार्यालय पहुंचने के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ा और धक्का-मुक्की, गाली-गलौज तथा जूते-चप्पल चलने की घटना सामने आई।

मौके पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला। राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और सहारनपुर के सांसद एवं प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने कार्यकर्ताओं को शांत कराने का प्रयास किया, जिसके बाद कार्यक्रम की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।

जांच समिति के गठन पर भी चर्चा

घटना के बाद पार्टी के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जांच के लिए अलग समिति गठित किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब समिति की जांच और उसके निष्कर्षों पर सबकी निगाहें रहेंगी। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि घटना के लिए किन परिस्थितियों और व्यक्तियों की भूमिका जिम्मेदार रही।

2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने संगठनात्मक चुनौती

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन और संगठन को मजबूत करने की कवायद चल रही है। ऐसे समय में पार्टी मुख्यालय के भीतर सामने आया विवाद कांग्रेस के लिए संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद पार्टी नेतृत्व के सामने प्रदेश में संगठन को सक्रिय करने तथा कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाए रखने की चुनौती है। अब जांच समिति की रिपोर्ट और पार्टी नेतृत्व की आगे की कार्रवाई इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।