डेस्क : भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और अजरबैजान शांति, प्रगति तथा समृद्धि को बढ़ावा देने में साझा हित रखते हैं। दोनों देश आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता जैसी साझा चुनौतियों से निपटने तथा अपने नागरिकों की सुरक्षा और समृद्धि के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमत हैं।
अजरबैजान की राजधानी बाकू में अपने आधिकारिक दौरे के दौरान जयशंकर ने अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने बातचीत को सकारात्मक और उपयोगी बताते हुए भारत-अजरबैजान संबंधों को आगे बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग पर जोर
बैठक में दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद को मजबूत करने, उच्चस्तरीय यात्राओं के आदान-प्रदान और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। व्यापार, निवेश, संपर्क सुविधाओं और ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को विस्तार देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
जयशंकर ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। दोनों पक्षों ने भारत और अजरबैजान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के अवसरों पर विचार किया।
ईरान से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में सहयोग के लिए जताया आभार
भारत के विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होने के दौरान ईरान से भारतीय नागरिकों, विशेषकर विद्यार्थियों, को सुरक्षित निकालने में अजरबैजान की ओर से मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधी मुद्दों, आतंकवाद और साझा खतरों पर भी चर्चा हुई।
भारत ने अजरबैजान-अर्मेनिया शांति समझौते का किया स्वागत
क्षेत्रीय घटनाक्रम पर चर्चा के दौरान भारत ने अजरबैजान और अर्मेनिया के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया। भारत ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता की उम्मीद जताई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध सहयोग को आगे बढ़ाने का आधार प्रदान करते हैं। हालिया वार्ता में राजनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
जयशंकर ने अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव को भारत आने का निमंत्रण भी दिया। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।









