डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मंगलवार को दावा किया कि उसकी सेनाओं ने मध्य पूर्व में ईरान से जुड़े पांच कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट कर दिया। CENTCOM के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोत को 48 घंटे के भीतर दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश के जवाब में की गई।
CENTCOM ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत ने दोनों मिसाइल हमलों को सफलतापूर्वक चकमा दे दिया। हमले में किसी अमेरिकी सैन्यकर्मी को चोट नहीं आई और युद्धपोत को किसी तरह का परिचालन नुकसान भी नहीं हुआ। अमेरिकी नौसेना का जहाज क्षेत्रीय जलक्षेत्र में अपनी गश्त जारी रखे हुए है।
पांच तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमला
CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के सरकारी नेटवर्क से जुड़े समुद्री बेड़े के पांच जहाजों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की। इनमें M/T Kaviz, M/T Charminar, M/T Horizon 1 और M/T Riesco को Gulf of Oman में नष्ट किया गया, जबकि M/T Derya को Kharg Island के पास निशाना बनाया गया।
अमेरिकी कमांड ने दावा किया कि हमले से पहले पांचों जहाजों के चालक दल को जहाज खाली करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद जहाजों को निशाना बनाकर उन्हें संचालन के लिहाज से निष्क्रिय कर दिया गया।
CENTCOM ने इन जहाजों को ईरान के सुरक्षा तंत्र के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत बताया है। अमेरिकी कमांड के मुताबिक, ये जहाज अरबों डॉलर के उस कथित ‘शैडो नेटवर्क’ का हिस्सा हैं, जिसके जरिए IRGC और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को आर्थिक मदद मिलती है।
तीन दिन में दूसरी बड़ी अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिका की यह कार्रवाई पिछले तीन दिनों में ईरानी समुद्री ढांचे के खिलाफ दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई है। CENTCOM ने कहा कि 5 सितंबर को भी अमेरिकी सेनाओं ने तीन ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट किया था। उस समय IRGC ने अमेरिकी विमानवाहक पोत और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर को निशाना बनाने की कोशिश की थी।
CENTCOM ने दावा किया कि अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोतों के खिलाफ IRGC के सभी प्रयास अब तक विफल रहे हैं।
ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों और युद्धपोतों को बनाया निशाना
दूसरी ओर, ईरान के IRGC ने अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में अमेरिकी सैन्य ठिकाने और नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने ‘या हैदर कर्रार’ नाम से सैन्य अभियान शुरू किया।
IRGC के अनुसार, उसने जॉर्डन स्थित अमेरिकी संचालित अल-अजराक एयरबेस पर तरल और ठोस ईंधन वाली बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान ने दावा किया कि मिसाइल हमलों में उन हैंगर और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जहां F-35, F-16 और F-15 लड़ाकू विमान तैनात थे।
ईरान ने अमेरिकी नौसेना के दो विध्वंसक जहाजों DDG-119 और DDG-53 पर भी बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने का दावा किया। IRGC ने कहा कि इन हमलों में जहाजों को “महत्वपूर्ण नुकसान” पहुंचा है।
जॉर्डन और सीरिया में एयर डिफेंस सक्रिय
ईरानी मिसाइल हमलों के बाद क्षेत्र के कई देशों में हवाई सुरक्षा प्रणालियां सक्रिय कर दी गईं। रिपोर्टों के मुताबिक, जॉर्डन की एयर डिफेंस इकाइयों ने अम्मान और आसपास के इलाकों के ऊपर कम से कम आठ ईरानी मिसाइलों को रोकने का दावा किया।
सीमा क्षेत्र में भी कई प्रकार की मिसाइलें देखे जाने की खबर है। सीरियाई सरकारी टेलीविजन के अनुसार, सीरिया ने सीमा के पास इरबिद क्षेत्र के ऊपर आने वाली कुछ ईरानी मिसाइलों को भी इंटरसेप्ट किया।
ईरान ने अमेरिकी मानवरहित पनडुब्बी कब्जे में लेने का दावा किया
इस बीच, IRGC की नौसेना ने दावा किया कि उसने Strait of Hormuz के प्रवेश द्वार के पास एक अमेरिकी मानवरहित अंडरवाटर वाहन को कब्जे में लिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई एक जटिल खुफिया और सैन्य अभियान के दौरान की गई।
ईरान का दावा है कि इस मानवरहित पनडुब्बी में समुद्र के भीतर निगरानी और संचालन से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीक मौजूद थी और इसे वर्ष 2025 में अमेरिकी बेड़े में शामिल किया गया था।
बढ़ते हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब समुद्री क्षेत्र से निकलकर क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों और हवाई क्षेत्र तक फैलता दिखाई दे रहा है।








