ब्रिक्स में पुतिन का पश्चिम पर निशाना, बोले- पता नहीं G-7 क्यों कहते हैं खुद को

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नई दिल्ली :  भारत की मेजबानी में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों पर तीखा निशाना साधा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में जी-7 से आगे निकल चुका है और पश्चिमी देश अपना दबदबा वापस कायम करने के लिए अनुचित तरीकों का सहारा ले रहे हैं।

भारत मंडपम में आयोजित फोरम को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को और बढ़ावा देना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और सदस्य देशों के बीच भरोसेमंद कारोबारी संबंध अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग की मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि ब्रिक्स देश वर्तमान में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 40 प्रतिशत योगदान दे रहे हैं, जबकि जी-7 देशों की हिस्सेदारी लगभग 28-29 प्रतिशत है। इसी संदर्भ में उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि वे अपने आप को जी-7 क्यों कहते हैं।” पुतिन की इस टिप्पणी पर फोरम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।

पुतिन ने पश्चिमी देशों पर वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने के लिए दबाव की नीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जलमार्गों को बाधित करना और समुद्री जहाजों को जब्त करना जैसे कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा करते हैं।

उन्होंने ईरान का उदाहरण देते हुए कहा कि लगातार लगाए गए प्रतिबंधों का असर उसके व्यापार, शिपिंग और वैश्विक वित्तीय नेटवर्क तक पहुंच पर पड़ा है। पुतिन ने कहा कि ऐसे हालात में ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और व्यापारिक संपर्कों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि मजबूत बिजनेस-टू-बिजनेस संबंध और आर्थिक साझेदारियां अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को अधिक स्थिर और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने ब्रिक्स को वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी मंच बनाने पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी फोरम में वैश्विक आर्थिक सहयोग और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संघर्षों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। रूस, चीन, ईरान समेत ब्रिक्स के सदस्य देशों के शीर्ष नेता इसमें हिस्सा ले रहे हैं।