मुनिश्री तत्त्व रुचि जी का सद्भावना संदेश— “काश! मिले मंदिर में अल्लाह, मस्जिद में भगवान”

0

जयपुर : अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के तीसरे दिन शनिवार को मालवीय नगर स्थित अणुविभा केन्द्र में साम्प्रदायिक सद्भावना दिवस के अवसर पर सर्वधर्म सम्मेलन आयोजित किया गया। अणुव्रत समिति जयपुर की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने प्रेम, शांति, मानवता और आपसी सद्भाव को समाज की आवश्यकता बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ के उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अपनी काव्यमय पंक्तियों के माध्यम से सद्भावना का संदेश देते हुए कहा, “ऐसा कोई जहान मिले, चेहरों पर मुस्कान मिले। काश! मिले मंदिर में अल्लाह, मस्जिद में भगवान मिले।” उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम, मैत्री, एकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ने कहा कि विकास के लिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व आवश्यक है। साम्प्रदायिक सद्भाव तभी स्थापित हो सकता है, जब मनुष्य एक-दूसरे को समझने, सहन करने और परस्पर सम्मान करने का भाव विकसित करे। उन्होंने भगवान महावीर के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य-मनुष्य की एक ही जाति है और वह है मानव जाति। महापुरुषों ने सदैव एकता, भाईचारे और शांति का मार्ग दिखाया है।

सम्मेलन में मुनिश्री संभव कुमार जी ने काव्यमय प्रस्तुति दी। सिख धर्म से जुड़े सरदार जसबीर सिंह, पूर्व अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग, ने कहा कि अणुव्रत मानव धर्म की भावना को आगे बढ़ाता है और सभी धर्म-सम्प्रदायों को इससे जोड़ा जा सकता है। उन्होंने अनेकांत के माध्यम से वैश्विक समस्याओं के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।

गांधी विचारक श्री सवाई सिंह जी ने सोशल मीडिया पर बढ़ती हिंसा और नफरत से जुड़ी सामग्री पर चिंता जताई। ईसाई धर्म के पादरी श्री विजय पॉल जी ने ईश्वर से जुड़ने और प्रेम का संदेश दिया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री शांतिलाल जी गोलछा ने विश्व में मंडराते युद्ध के खतरे के संदर्भ में साम्प्रदायिक तनाव को गंभीर विषय बताया।

कार्यक्रम में अणुव्रत समिति के श्री विनोद जी बैद ने स्वागत भाषण दिया और अणुव्रत आचार संहिता का वाचन कराया। युवा कार्यकर्ता श्री संदीप जी भंडारी ने ‘जगत में मानव धर्म महान’ प्रेरक गीत प्रस्तुत कर मंगलाचरण किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में तीर्थंकर पद्म प्रभु की स्तुति में भक्ति गीत प्रस्तुत किया गया। साथ ही प्रेक्षाध्यान के प्रयोगों के माध्यम से उपस्थित लोगों को ध्यान और आत्मचिंतन का अनुभव कराया गया।

अणुव्रत समिति की मंत्री श्रीमती जयश्री जी सिद्धा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ भारतीय संस्कृति का अमर संदेश है। अणुव्रत के माध्यम से जन-जन तक मानवता, प्रेम और शांति का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश में समरसता और सौहार्द की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।

नशामुक्ति मैराथन से दिया जाएगा जागरूकता का संदेश

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के चौथे दिन रविवार को जवाहर सर्किल से अणुविभा केन्द्र (डब्ल्यू.टी.पी.) तक नशामुक्ति मैराथन दौड़ आयोजित की जाएगी। अणुव्रत समिति की मंत्री श्रीमती जयश्री जी सिद्धा ने बताया कि मैराथन के समापन अवसर पर मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी के सान्निध्य में नशामुक्ति, अहिंसा, संयम और अनुशासन विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा।