लाडनूं : शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में आज अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत सांप्रदायिक सौहार्द दिवस का आयोजन हुआ। साथ ही तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा सातवीं एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस भी आयोजित हुई जिसमें देशभर से ऑफिसर्स सम्मिलित हुए।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने मंगल देशना में फ़रमाया कि मनुष्य को स्वयं सत्य खोजने का प्रयास करना चाहिए। हम दूसरों के द्वारा बताई गई बात को भी मान सकते हैं और कई बार मानना अच्छा भी हो सकता है, पर स्वयं सत्य का साक्षात्कार करें, वह सबसे ऊंची बात हो सकती है। जो पूर्ण ज्ञानी हैं, सर्वज्ञ हैं, उनके न कोई अस्पष्टता रहती है, न कोई संशय और न कोई अज्ञान। केवलज्ञान मान लो अभी नहीं है, पर मति-श्रुत ज्ञान या अतींद्रिय ज्ञान के माध्यम से भी हम स्वयं सत्य तक पहुँचने का यत्न करें। एक वैज्ञानिक भी जब सच्चाई को खोजने का प्रयास करता है, तो वह भी यथार्थ और तथ्यों को प्राप्त कर सकता है। धार्मिक जगत में भी यथार्थ का बड़ा महत्व है; विज्ञान और अध्यात्म में यही एक सुंदर समानता है कि दोनों ही क्षेत्रों में सच्चाई को पाने का सतत प्रयत्न होता है। इसके साथ ही जीवन में सभी प्राणियों के प्रति मैत्री का भाव होना चाहिए। इंसान जन्म लेकर यदि इंसान से ही प्यार न कर सके, तो फिर भगवान से क्या भक्ति करेगा? भगवान की भक्ति बहुत बढ़िया बात है, पर इंसान में भी भगवान का ही रूप देखना चाहिए और आपस में भाईचारा व मैत्री बनाए रखनी चाहिए।
आचार्य श्री ने सांप्रदायिक सौहार्द पर बल देते हुए कहा कि दुनिया में अनेक धर्म, संप्रदाय और पूजा-उपासना की अपनी-अपनी पद्धतियां हो सकती हैं, पर अणुव्रत के कुछ सिद्धांत सर्वमान्य हैं।जैसे ईमानदारी रखना, चोरी-डकैती न करना और किसी को व्यर्थ का कष्ट न पहुँचाना। उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि गाय चाहे काली हो, पीली हो या लाल, पर उसका दूध हमेशा सफेद ही निकलता है। आदमी का रंग गोरा हो या सांवला, पर रगों में बहने वाला खून सबका लाल ही होता है। ठीक इसी प्रकार संप्रदायों की वेशभूषा और मान्यताएं अलग हो सकती हैं, लेकिन अहिंसा और नैतिकता वह साझा दूध है जिससे जैन, सनातनी और मुसलमान सभी पूरी तरह सहमत हैं। इसलिए धर्मगुरुओं और संप्रदाय के प्रमुखों का यह दायित्व है कि ईमानदारी, नैतिकता व पारदर्शिता का रास्ता दिखाएं। किसी का हक या संपत्ति हड़पने का प्रयास न हो। अणुव्रत का मूल संदेश भी यही है ‘इंसान पहले इंसान, फिर हिंदू या मुसलमान।’ सादा जीवन और उच्च विचार ही मानव जीवन का वास्तविक श्रृंगार हैं। किसी भी ग्रंथ, पंथ या संत के पास यदि कोई कल्याणकारी बात है, तो उसका विरोध नहीं, बल्कि यथायोग्य आदर और सम्मान होना चाहिए।
इस अवसर पर कार्यक्रम में लाडनूं शहर काजी श्री मोहम्मद मदनी, ब्रह्माकुमारी से सुप्रभा बहन ने अपने विचार रखे।
समारोह में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा सातवीं एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ। इसके अंतर्गत तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम से श्री पुष्प पटावरी, श्रीमती एकता जैन डेपुटी सेक्रेटरी मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस गवर्नमेंट ऑफ इंडिया, आईएएस श्री कुलदीप रांका एडिशनल चीफ सेक्रेटरी गवर्नमेंट ऑफ राजस्थान ने अपने विचार रखे।
अहमदाबाद ज्ञानशाला एवं डोंबिवली ज्ञानशाला के बच्चों ने गुरु चरणों में प्रस्तुति दी।








