ऊर्जा परियोजना पर OIL की नई रणनीति, सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेने की मिली मंजूरी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को असम के डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के नीचे हाइड्रोकार्बन निकालने के लिए प्रस्तावित एक्सटेंडेड रीच ड्रिलिंग (ERD) परियोजना से जुड़ी अपनी अंतरिम अर्जी वापस लेने की अनुमति दे दी। अदालत ने कंपनी को नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता भी दी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे, ने यह आदेश OIL की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी की दलीलों के बाद दिया। द्विवेदी ने मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि यह परियोजना देश की ऊर्जा जरूरतों से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना है।

OIL के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना में राष्ट्रीय उद्यान के भीतर ड्रिलिंग या स्थायी ढांचा स्थापित नहीं किया जाना है। कंपनी का कहना है कि ड्रिलिंग का काम संरक्षित क्षेत्र के बाहर से किया जाएगा और करीब 3,500 से 4,000 मीटर की गहराई पर मौजूद हाइड्रोकार्बन भंडार तक पहुंचने के लिए ERD तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी ने तर्क दिया कि यह पारंपरिक खनन गतिविधि नहीं है।

वन भूमि और पर्यावरण मंजूरी पर विवाद

OIL ने वन सलाहकार समिति के फैसले और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की ओर से परियोजना के लिए 0.069 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को मंजूरी नहीं दिए जाने को चुनौती दी थी।

कंपनी का कहना था कि संबंधित अधिकारियों ने संरक्षित क्षेत्रों के भीतर और आसपास खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 2023 के आदेश की गलत व्याख्या करते हुए उसकी परियोजना पर रोक लगाई है। OIL ने इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का भी हवाला दिया, जिनमें ERD तकनीक के जरिए राष्ट्रीय उद्यान के नीचे से हाइड्रोकार्बन निकालने की अनुमति दी गई थी।

कंपनी ने विशेष रूप से 2017 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख किया, जिसमें निर्धारित शर्तों और पर्यावरणीय एवं वन्यजीव सुरक्षा उपायों के पालन के साथ राष्ट्रीय उद्यान के नीचे से हाइड्रोकार्बन निकालने की अनुमति दी गई थी।

OIL के अनुसार, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने भी इस परियोजना की सिफारिश की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण संबंधी शर्तों के अनुपालन के अधीन भूमिगत हाइड्रोकार्बन निष्कर्षण की अनुमति दी थी।

नई याचिका दाखिल करने की छूट

OIL ने 2 अगस्त 2024 को MoEFCC की ओर से पारित आदेश और 4 जुलाई 2024 को हुई वन सलाहकार समिति की बैठक के कार्यवृत्त को रद्द करने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि चूंकि शीर्ष अदालत ने मूल कार्यवाही को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया है, इसलिए यदि कोई नया कारण या नई कार्रवाई सामने आई है तो उसे नई याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष लाया जाना चाहिए।

इसके बाद पीठ ने OIL को मौजूदा अंतरिम आवेदन वापस लेने की अनुमति देते हुए नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी।