राम मंदिर ट्रस्ट पर सियासी घमासान, अखिलेश यादव ने भाजपा पर उठाए सवाल

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डेस्क : अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े हालिया घटनाक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने मंदिर से जुड़ी आस्था और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और अयोध्या में गरीब लोगों की जमीन से जुड़े मामलों ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और उनकी आस्था के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।

पहली बार नियुक्त हुआ राम मंदिर ट्रस्ट का CEO

राम मंदिर ट्रस्ट ने बुधवार को सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला CEO नियुक्त किया। जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के पश्चिमी वायु कमान के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ट्रस्ट की बैठक में तीन नए ट्रस्टियों की भी नियुक्ति की गई।

इसके साथ ही गोविंद देव गिरि को ट्रस्ट का नया महासचिव और महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है। नए ट्रस्टियों में महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव शामिल हैं। डॉ. निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य बनी हैं।

चढ़ावे की कथित हेराफेरी पर पहले भी सवाल उठा चुके हैं अखिलेश

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी के मामले में पहले भी अखिलेश यादव ने सरकार और ट्रस्ट की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उन्होंने जांच की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल किया था कि यदि जांच किसी संस्था के कामकाज की हो रही है तो उस जांच की निगरानी और जवाबदेही किसके प्रति होगी।

इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी और मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद विवाद और गहरा गया था। सरकार की ओर से भी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही गई थी।

राजनीतिक मुद्दा बनने लगा राम मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव ऐसे समय हुए हैं जब अयोध्या में मंदिर से जुड़े प्रबंधन और चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। CEO की नियुक्ति और नए ट्रस्टियों के चयन को ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं विपक्ष इसे पारदर्शिता और जवाबदेही के सवालों से जोड़कर सरकार पर हमला कर रहा है।

राम मंदिर को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी पहले भी तेज रही है। ऐसे में ट्रस्ट के नए प्रशासनिक ढांचे और अखिलेश यादव के ताजा बयान के बाद आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और गरमाने की संभावना है।