‘प्रतिबंधों की लत’ में अमेरिका! ईरान ने वॉशिंगटन पर बोला तीखा हमला

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तेहरान: ईरान ने अमेरिका की प्रतिबंध नीति पर तीखा हमला बोलते हुए वॉशिंगटन पर आर्थिक प्रतिबंधों का “आदी” होने का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका जब कूटनीति के जरिए अपने उद्देश्यों को हासिल करने में विफल रहता है, तो प्रतिबंधों का सहारा लेता है और उनके प्रभावी न होने पर दबाव और बढ़ा देता है।

बघाई ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की कथित टिप्पणी का जवाब दिया। बेसेंट ने ईरान पर अमेरिकी आर्थिक दबाव को “घुटन पैदा करने वाला” बताया था।

बघाई ने कहा कि अमेरिकी वित्त मंत्री द्वारा ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए “घुटन” में डालने की बात करना अमेरिका की “प्रतिबंधों की बाध्यकारी लत” को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वॉशिंगटन के लिए प्रतिबंध अब महज विदेश नीति का एक साधन नहीं, बल्कि एक आदत बन चुके हैं।

ईरानी प्रवक्ता ने कहा कि जब अमेरिका कूटनीति के जरिए अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाता, तो वह प्रतिबंधों की ओर लौटता है। जब प्रतिबंध अपेक्षित परिणाम नहीं देते, तो उनकी तीव्रता और बढ़ा दी जाती है। उन्होंने इसे “नीति नहीं, बल्कि आदत” और उससे भी आगे “लत” करार दिया।

बघाई ने कहा कि ईरान ने पिछले कई दशकों में यह साबित किया है कि वह आर्थिक प्रतिबंधों के दबाव में झुकने वाला नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के दबाव पर लगातार निर्भरता से अमेरिका के सामने खुद अपने लिए पैदा किए गए संकट से सम्मानजनक रास्ता निकालने की संभावनाएं और सीमित हो सकती हैं।

ईरान की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब अमेरिका तेहरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए एकतरफा प्रतिबंधों का लगातार इस्तेमाल कर रहा है। वॉशिंगटन का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान की वित्तीय पहुंच और उन नेटवर्क पर अंकुश लगाना है, जिनके जरिए ईरानी सरकार को आर्थिक मदद मिलती है।

इससे पहले 7 अगस्त को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक्स पर कहा था कि ईरानी शासन डिजिटल परिसंपत्तियों और “शैडो बैंकिंग नेटवर्क” पर बढ़ती निर्भरता दिखा रहा है। उन्होंने इसे अमेरिकी आर्थिक दबाव के प्रभाव का प्रमाण बताया।

बेसेंट ने कहा था कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाता रहेगा और डॉलर, रियाल या क्रिप्टो—किसी भी माध्यम से संचालित ऐसे वित्तीय नेटवर्क की पहचान कर उन्हें खत्म करने की कार्रवाई करेगा, जिन्हें अमेरिका अवैध मानता है।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच प्रतिबंध एक बार फिर दोनों देशों के बीच टकराव का प्रमुख मुद्दा बनते दिख रहे हैं। जहां वॉशिंगटन आर्थिक दबाव को ईरान पर प्रभाव डालने के अहम साधन के रूप में देखता है, वहीं तेहरान इसे कूटनीतिक विफलता और दबाव की नीति के तौर पर खारिज करता रहा है।