डेस्क : भारत ने कहा है कि दुनिया में जारी संघर्ष वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बनते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) को तत्काल संघर्षों के मानवीय प्रभावों को कम करने और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित, तेज तथा निर्बाध मानवीय सहायता पहुंचाने पर ध्यान देना चाहिए।
यूएनएससी में मंगलवार को आयोजित ‘फूड अंडर फायर : द सिक्योरिटी काउंसिल्स रोल इन मिटिगेटिंग ग्लोबल एंड लोकल फूड क्राइसिस’ विषयक खुली बहस को संबोधित करते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि आज के संघर्षों का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। ऊर्जा बाजार, उर्वरक आपूर्ति, समुद्री परिवहन, मानवीय राहत व्यवस्था और कृषि व्यापार में होने वाले व्यवधानों का असर दुनिया के दूसरे हिस्सों की खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ता है।
हरीश ने कहा कि आयात पर अधिक निर्भर विकासशील देशों को ऐसे व्यवधानों का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है। उन्होंने सुरक्षा परिषद से संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित और निर्बाध मानवीय सहायता सुनिश्चित करने तथा संघर्षरत पक्षों के बीच तनाव कम करने की व्यवस्था को समर्थन देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए प्रतिबंध इस तरह लागू किए जाने चाहिए कि वे मानवीय सहायता या वैध खाद्य एवं कृषि व्यापार में अनजाने में बाधा न बनें। हालांकि, हरीश ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा और मजबूत खाद्य प्रणालियों का निर्माण मुख्य रूप से राष्ट्रीय सरकारों की जिम्मेदारी है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र की विकास प्रणाली और रोम स्थित संबंधित एजेंसियां सहयोग करती हैं।
खाद्य सुरक्षा में भारत की उपलब्धियां गिनाईं
भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने देश में खाद्य सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सब्सिडी वाले खाद्यान्न की कानूनी व्यवस्था और पीएम-किसान योजना के जरिए 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण ने छोटे एवं सीमांत किसानों की आर्थिक क्षमता को मजबूत किया है।
उन्होंने 2023 में भारत की पहल पर मनाए गए ‘अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे जलवायु-अनुकूल और पोषक फसलों को लेकर दुनिया का ध्यान बढ़ा। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों के साथ इन प्रयासों ने भारत को खाद्य सुरक्षा के मामले में मजबूत बनाया है और वह वैश्विक खाद्य आपूर्ति में भी योगदान दे रहा है।
गुटेरेस ने ब्लैक सी, होर्मुज और लाल सागर का किया उल्लेख
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने खाद्य आपूर्ति पर पड़ रहे भू-राजनीतिक संकटों के प्रभाव को रेखांकित करते हुए ब्लैक सी, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर का विशेष रूप से उल्लेख किया।
गुटेरेस ने कहा कि यूक्रेन युद्ध के कारण ब्लैक सी के जरिए यूक्रेन और रूस से होने वाले अनाज तथा ऊर्जा निर्यात प्रभावित हुए हैं। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही पर प्रतिबंधों और व्यवधानों से जिंसों की कीमतें बढ़ी हैं और उपलब्धता में कमी आई है। लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों ने खाद्य और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा किया है।
गुटेरेस ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज में उर्वरक और खाद्यान्नों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक संरक्षित गलियारा बनाने का व्यावहारिक ढांचा तैयार किया है। शुरुआती चरण में इसका ध्यान उर्वरक और संबंधित कच्चे माल की आवाजाही पर रहेगा, जिसे आगे अन्य वस्तुओं तक बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि यूएन ऑफिस फॉर प्रोजेक्ट सर्विसेज (यूएनओपीएस) के नेतृत्व में गठित टास्क फोर्स ने उर्वरक और संबंधित उत्पादों को ले जाने वाले जहाजों के पंजीकरण एवं सत्यापन के लिए परिचालन ढांचा तैयार कर लिया है। अब इसके लिए संबंधित पक्षों के सहयोग और राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के कार्यवाहक निदेशक कार्ल स्काउ ने भी चेतावनी दी कि समुद्री व्यापार में गंभीर व्यवधान दुनिया भर में करोड़ों और लोगों को खाद्य असुरक्षा की ओर धकेल सकते हैं।








