सरकारी वाहनों के इस्तेमाल पर सख्ती, ‘वन ऑफिसर-वन कार’ नियम लागू

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नई दिल्ली :  केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को लेकर नियमों को और सख्त करते हुए अधिकारियों के लिए ‘वन ऑफिसर, वन ऑफिशियल कार’ व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब सरकारी वाहन के पात्र किसी अधिकारी को एक से अधिक आधिकारिक कार आवंटित नहीं की जाएगी। अधिकारी के पास किसी अन्य मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) या स्वायत्त निकाय का अतिरिक्त प्रभार होने की स्थिति में भी उसे दूसरी सरकारी गाड़ी नहीं मिलेगी।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से जारी निर्देश में सभी मंत्रालयों और विभागों को नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। सरकार का यह कदम सरकारी वाहनों के बेहतर उपयोग, अनावश्यक खर्च में कमी और वाहनों के संभावित दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

PSU और स्वायत्त संस्थाओं की गाड़ियों पर भी रोक

नए निर्देशों के तहत केंद्र सरकार के अधिकारी नियमित उपयोग के लिए सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्त निकायों या अर्ध-सरकारी संस्थाओं की स्टाफ कार अपने पास नहीं रख सकेंगे। हालांकि, आधिकारिक दौरे के दौरान जरूरत पड़ने पर इन वाहनों के इस्तेमाल की अनुमति होगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो सरकारी वाहन फिलहाल इस्तेमाल में नहीं हैं, उन्हें सुरक्षित कस्टडी में रखा जाए, ताकि वे अनावश्यक रूप से निष्क्रिय न रहें या उनका गलत इस्तेमाल न हो।

निजी यात्रा के लिए सरकारी कार के इस्तेमाल की शर्तें

नए निर्देश सितंबर 2022 में जारी सरकारी वाहन संबंधी दिशा-निर्देशों को भी मजबूती देते हैं। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, पात्र अधिकारी प्रति माह 3,000 रुपये का भुगतान कर सरकारी वाहन का निजी यात्रा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी सीमा अधिकतम 500 किलोमीटर प्रति माह है। इस सुविधा का लाभ लेने वाले अधिकारियों को नियमित मासिक परिवहन भत्ता छोड़ना होता है।

केंद्र सरकार का मानना है कि ‘वन ऑफिसर, वन कार’ व्यवस्था से सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित होगा और अधिकारियों को एक से अधिक सरकारी वाहनों की सुविधा मिलने की संभावना पर रोक लगेगी।