SAARC पर भारत का दो टूक संदेश, कहा- सहयोग के लिए सद्भावना जरूरी

0

नई दिल्ली : भारत ने दक्षिण एशियाई क्षेत्र में मजबूत क्षेत्रीय सहयोग का समर्थन करते हुए कहा है कि वह पिछले कई दशकों से इस दिशा में लगातार प्रयास करता रहा है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट संकेत दिया कि सभी देश जानते हैं कि कौन-सा देश और उसकी कौन-सी गतिविधियां दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की प्रक्रिया में बाधा डाल रही हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि किसी भी प्रकार के सहयोग के लिए आपसी सद्भावना जरूरी है। उन्होंने कहा, “भारत मजबूत क्षेत्रीय सहयोग का पक्षधर है और पिछले कई दशकों से इसके लिए काम कर रहा है। दक्षिण एशिया में हर कोई जानता है कि कौन-सा देश और उसकी कौन-सी गतिविधियां SAARC को बाधित कर रही हैं। आखिरकार, सहयोग के लिए सद्भावना आवश्यक है।”

जायसवाल से मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की ओर से SAARC प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने की अपील को लेकर सवाल पूछा गया था। मुइज्जू ने रविवार को मालदीव के 61वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान SAARC के सदस्य देशों से क्षेत्रीय शांति और सहयोग के हित में आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की थी।

मुइज्जू ने SAARC में जारी गतिरोध का उल्लेख करते हुए सदस्य देशों से फिर बातचीत की मेज पर लौटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मालदीव संगठन के सामने मौजूद गतिरोध को दूर करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है। समारोह में 43 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 113 राजनयिक मौजूद थे।

SAARC में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पार आतंकवाद को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच संवाद प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।

इस बीच, बांग्लादेश ने भी जुलाई में दक्षिण एशिया के भीतर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद ने SAARC को पुनर्जीवित करने के लिए संगठन की कार्यान्वयन क्षमता मजबूत करने, वित्तीय संसाधन बढ़ाने और प्रभावी तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई थी। उन्होंने सदस्य देशों के बीच वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और मंत्रिपरिषद की विशेष बैठक आयोजित करने की संभावनाओं का भी उल्लेख किया था।

वहीं, भारत-चीन सीमा व्यापार को लेकर पूछे गए सवाल पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच तीन निर्धारित व्यापारिक मार्गों—लिपुलेख दर्रा, शिपकी ला दर्रा और नाथू ला दर्रा—से सीमा व्यापार फिर शुरू करने पर सहमति बनी थी और इस दिशा में आगे की प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने यह भी बताया कि नेपाल के प्रधानमंत्री को भारत यात्रा के लिए आमंत्रण भेजा गया है।