नई दिल्ली : घरेलू कोयला और लिग्नाइट के गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को पहले ही दौर में अच्छा प्रतिसाद मिला है। योजना के तहत सात आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें तीन आवेदन अडानी एंटरप्राइजेज की ओर से हैं। सरकार का कहना है कि उद्योग जगत की इस भागीदारी से देश में कोयला गैसीकरण को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूती मिली है।
कोयला मंत्रालय के अनुसार, अडानी एंटरप्राइजेज, गैलेंट इस्पात, एनटीपीसी, श्याम सेल एंड पावर और तालचेर फर्टिलाइजर्स ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए आवेदन किए हैं। प्रस्तावों में यूरिया, डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई), सिंथेसिस गैस (सिंगैस) और सिंथेटिक नेचुरल गैस (एसएनजी) से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
अडानी एंटरप्राइजेज ने यूरिया परियोजनाओं के लिए तीन अलग-अलग आवेदन किए हैं। गैलेंट इस्पात ने डीआरआई और सिंगैस परियोजना के लिए प्रस्ताव दिया है। वहीं, एनटीपीसी ने सिंथेटिक नेचुरल गैस परियोजना, श्याम सेल एंड पावर ने सिंगैस परियोजना और तालचेर फर्टिलाइजर्स ने यूरिया परियोजना के लिए आवेदन किया है।
पहले दौर की आवेदन प्रक्रिया सात जुलाई 2026 को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी होने के बाद शुरू हुई थी। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी प्रस्तावों का योजना के दिशा-निर्देशों और आरएफपी के प्रावधानों के आधार पर विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।
कोयला मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पहले ही दौर में सात आवेदन मिलना योजना के प्रति उद्योग जगत के भरोसे को दर्शाता है। इनमें बड़े औद्योगिक समूहों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भागीदारी भी शामिल है।
2030 तक 100 मिलियन टन गैसीकरण क्षमता का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 को इस योजना को मंजूरी दी थी। 37,500 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य घरेलू कोयला और लिग्नाइट को सिंगैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया और हाइड्रोजन जैसे अधिक मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
सरकार ने 2030 तक देश में 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसमें 75 मिलियन टन क्षमता इसी योजना के तहत विकसित किए जाने का लक्ष्य है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, योजना से 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित हो सकता है और पूरी वैल्यू चेन में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
यह योजना जनवरी 2024 में मंजूर की गई 8,500 करोड़ रुपये की पूर्ववर्ती कोयला गैसीकरण योजना की अगली कड़ी है। मंत्रालय के अनुसार, उस योजना के तहत आठ गैसीकरण परियोजनाएं फिलहाल क्रियान्वयन के चरण में हैं।
दूसरे दौर के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू
योजना के तहत आवेदन का दूसरा दौर 8 सितंबर 2026 से शुरू हो गया है। इसके बाद आवेदन के नए दौर दो-दो महीने के अंतराल पर खोले जाएंगे। मंत्रालय के मुताबिक, कई संभावित आवेदक अपनी परियोजनाओं की तैयारी के उन्नत चरण में हैं और आने वाले दौर में उनके प्रस्ताव प्राप्त होने की उम्मीद है।








