डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति में फिलहाल सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव को प्राथमिकता देने के संकेत दिए हैं। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ईरान पर नजर बनाए हुए है और वहां की गंभीर आर्थिक स्थिति तथा बढ़ती महंगाई का दबाव तेहरान पर असर डाल सकता है।
ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस से बातचीत में कहा कि अमेरिका फिलहाल ईरान के मामले में ‘लो-की’ रणनीति अपना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन अमेरिका ईरान की आर्थिक स्थिति पर नजर रख रहा है। ट्रंप के मुताबिक ईरान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और उसके पास पर्याप्त धन नहीं है।
ईरान पर प्रतिबंधों का बढ़ सकता है दबाव
ट्रंप ने ईरान की महंगाई को 300 प्रतिशत से अधिक होने का दावा किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान आर्थिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में है और उसके लिए तेल निर्यात करना भी मुश्किल हो गया है। ईरान पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों और विदेशों में मौजूद अपनी संपत्तियों तक सीमित पहुंच का सामना कर रहा है।
जुलाई के अंत में अमेरिका ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े लोगों और संस्थाओं को निशाना बनाते हुए नए कदम उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन अब मौजूदा प्रतिबंधों को और कड़ा करने तथा नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने पर भी विचार कर रहा है।
सैन्य विकल्प अभी भी खुला
हालांकि ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं किया है। उन्होंने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर तेहरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन फिलहाल उनका जोर ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने पर है। यह रुख उस समय सामने आया है जब इससे पहले ट्रंप ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले की चेतावनी देते रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा
ईरान-अमेरिका टकराव में रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य भी अहम केंद्र बना हुआ है। यह वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका का इस मार्ग पर पूरा नियंत्रण है, जबकि रिपोर्ट के अनुसार तेहरान ने मार्ग को लेकर अपना रुख सख्त बनाए रखा है और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी लागू की है।
ईरान ने बताया ‘पीछे हटना’
अमेरिकी प्रतिबंधों की नई रणनीति पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी प्रतिबंधों के नए प्रयास को ‘पीछे हटना’ बताया। उनका कहना है कि ईरान दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करता आया है और वॉशिंगटन जब कूटनीति में आगे नहीं बढ़ पाता, तो प्रतिबंधों का सहारा लेता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप आर्थिक दबाव की इस लंबी रणनीति पर कितने समय तक कायम रहते हैं। ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक बातचीत के बीच अमेरिकी नीति में लगातार बदलाव देखने को मिला है। ऐसे में आने वाले दिनों में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव किस दिशा में जाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।








