डेस्क : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को कहा कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच भारत समेत रूस के साझेदार देशों की उत्तरी समुद्री मार्ग (एनएसआर) में रुचि लगातार बढ़ रही है। उन्होंने भारत को आर्कटिक क्षेत्र में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सहयोग बढ़ाने में रुचि रखने वाले प्रमुख देशों में शामिल बताया।
प्रशांत बेड़े के सैन्यकर्मियों के साथ मिसाइल क्रूजर वरयाग पर हुई बैठक में पुतिन ने कहा कि रूस उत्तरी समुद्री मार्ग के विकास और इसके लाभों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के दायरे में रहकर करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि चीन, भारत और अन्य मित्र देशों के साथ इस दिशा में सक्रिय बातचीत चल रही है।
पुतिन ने कहा कि उत्तरी समुद्री मार्ग को लेकर बढ़ती दिलचस्पी के बीच आर्कटिक क्षेत्र में कृत्रिम तनाव भी बढ़ रहा है। उन्होंने बाहरी ताकतों की गतिविधियों और नाटो के विस्तार को इसका एक कारण बताया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस इस समुद्री मार्ग पर सहयोग को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
रूसी जहाजों को जब्त करने पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
इस बीच पुतिन ने यूरोपीय देशों को रूसी व्यापारिक जहाजों को जब्त करने के मुद्दे पर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर यूरोपीय देश रूसी जहाजों को जब्त करते हैं तो मॉस्को इसका जवाब उसी तरह देगा।
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, पुतिन ने संभावित जब्ती को ‘समुद्री डकैती और लूटपाट’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की कार्रवाई वास्तव में की जाती है तो रूस को भी जवाबी कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस की संभावित जवाबी कार्रवाई केवल उन समुद्री क्षेत्रों तक सीमित नहीं होगी, जहां रूसी जहाजों को रोका या जब्त किया गया है। उनके मुताबिक, रूस जहां आवश्यक और उचित समझेगा, वहां कार्रवाई की जा सकती है।
रूस के ‘शैडो फ्लीट’ पर यूरोप की नजर
पुतिन की यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब यूरोपीय संघ रूस के कथित ‘शैडो फ्लीट’ पर दबाव बढ़ा रहा है। शैडो फ्लीट में उन जहाजों को शामिल किया जाता है, जिन पर पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने और रूसी कच्चे तेल के निर्यात को जारी रखने में मदद करने का संदेह है।
यूरोपीय संघ ने ऐसे सैकड़ों जहाजों को प्रतिबंधों के दायरे में शामिल किया है। कुछ यूरोपीय देशों ने संदिग्ध जहाजों और उनके चालक दल की जांच के लिए उन्हें रोकने की कार्रवाई भी की है। इसके अलावा कई सरकारें प्रतिबंधों से बचने वाले जहाजों के खिलाफ समुद्री निगरानी और कार्रवाई को और सख्त करने पर विचार कर रही हैं।








