अब सरकारी दफ्तरों में परोसी जाएगी ‘सरकारी चाय’, मंत्रालयों को दिए गए निर्देश

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डेस्क : केंद्र सरकार ने सरकारी मंत्रालयों और विभागों में बैठकों, सम्मेलनों और आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान सरकारी कंपनी की चाय परोसने को बढ़ावा देने का फैसला किया है। भारी उद्योग मंत्रालय ने अन्य मंत्रालयों और संबंधित संगठनों से कैंटीन, कार्यालयी बैठकों, कॉन्फ्रेंस और विभागीय कार्यक्रमों में एंड्रयू यूल एंड कंपनी की चाय इस्तेमाल करने को कहा है।

सरकार का यह कदम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एंड्रयू यूल एंड कंपनी को समर्थन देने और उसके चाय कारोबार को बढ़ावा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कंपनी भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन आती है और असम तथा पश्चिम बंगाल में उसके करीब 15 चाय बागान हैं।

कंपनी ऑर्थोडॉक्स, सीटीसी, ग्रीन और फ्लेवर्ड चाय जैसी विभिन्न किस्मों का उत्पादन करती है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में सरकारी कार्यालयों में उसकी चाय के इस्तेमाल को बढ़ावा देने से ब्रांड की मांग और बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।

मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश में संबंधित विभागों और संगठनों से भी सरकारी आयोजनों में यूल चाय को प्राथमिकता देने की अपील की गई है। सरकार का मानना है कि इससे कंपनी को मजबूती मिलेगी और उसके कर्मचारियों को भी राहत मिल सकती है।

इस पहल का असर चाय बागानों में काम करने वाले लोगों पर भी पड़ने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक, चाय उद्योग को बढ़ावा मिलने से दूरदराज के क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को भी मजबूती मिल सकती है।

संसदीय समिति की ओर से भी सरकारी चाय के प्रचार और मंत्रालयों के माध्यम से इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने की सलाह दिए जाने की बात सामने आई है। सरकार का यह कदम ‘आत्मनिर्भर’ चाय को बढ़ावा देने की दिशा में एक पहल माना जा रहा है।