डेस्क : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार की योजनाओं में बदलाव का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों को मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर खरीदने के लिए दी जाने वाली 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता योजना को बंद करने का ऐलान किया है। यह योजना ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2022 में शुरू की गई थी।
शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार छात्रों की शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं के लिए खर्च करने को तैयार है, लेकिन विद्यार्थियों को मोबाइल फोन खरीदने के लिए सीधे आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित करने पर अधिक जोर देगी।
ममता सरकार की चर्चित योजना पर बदली नीति
ममता बनर्जी सरकार ने ‘तरुणेर स्वप्नो’ योजना के तहत कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को एकमुश्त 10 हजार रुपये की सहायता देना शुरू किया था। इसका उद्देश्य छात्रों को स्मार्टफोन, टैबलेट या कंप्यूटर खरीदने में मदद करना था, ताकि वे डिजिटल माध्यम से पढ़ाई कर सकें।
अब शुभेंदु अधिकारी सरकार के फैसले से इस योजना का भविष्य समाप्त हो गया है। भाजपा सरकार का तर्क है कि छात्रों को व्यक्तिगत रूप से मोबाइल देने के बजाय स्कूलों में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं विकसित करना अधिक उपयोगी होगा।
मोबाइल से दूरी, गुजरात मॉडल पर जोर
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्कूलों में छात्रों के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के स्कूलों में गुजरात मॉडल अपनाने और विद्यार्थियों को मोबाइल फोन से यथासंभव दूर रखने की बात कही है।
शिक्षक दिवस के कार्यक्रम में भी अधिकारी ने मोबाइल की बढ़ती लत को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने संकेत दिया था कि छात्रों के लिए स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने जैसा कड़ा फैसला लिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसा फैसला राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन बच्चों के हित में सरकार को कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।
सत्ता बदलने के बाद बदली कल्याणकारी योजनाओं की दिशा
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के 15 साल के शासन के बाद पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ भाजपा सरकार ने कई नीतिगत प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत दिया है। छात्र मोबाइल योजना को बंद करने का फैसला भी इसी राजनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।
जहां ममता सरकार की योजना सीधे छात्रों को आर्थिक सहायता देकर डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने पर केंद्रित थी, वहीं शुभेंदु अधिकारी सरकार अब स्कूलों के माध्यम से आधुनिक शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर देने की बात कर रही है। आने वाले समय में इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।








