देश पर छाई 10 हजार किमी लंबी बारिश की पट्टी, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

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नई दिल्ली :  देश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय होता नजर आ रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में भारत के ऊपर बादलों की एक विशाल पट्टी दिखाई दी है, जो उत्तर भारत से लेकर दक्षिण कोरिया तक करीब 7 से 10 हजार किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, मानसून की यह व्यापक गतिविधि 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के सबसे सक्रिय दौर में से एक है। इस स्थिति को ‘मैसिव मॉनसून डे’ के तौर पर देखा जा रहा है। अनुमान है कि इस सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण देश के करीब 88 से 92 फीसदी हिस्से पर बादलों का प्रभाव है।

इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर भारत के कई राज्यों में देखने को मिल सकता है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में तेज से भारी बारिश के हालात बनने की संभावना है। वहीं, पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत कई राज्यों में भी भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

बंगाल की खाड़ी में मजबूत हुआ मौसम तंत्र

मौसम में अचानक आए इस बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी में बना मजबूत अवदाब प्रमुख कारण माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चार दिनों से बंगाल की खाड़ी में एक मजबूत मौसम तंत्र सक्रिय है। इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ धीरे-धीरे दक्षिण की ओर अपने सामान्य स्थान की तरफ लौट रही है। इस बदलाव ने हिंद महासागर और अरब सागर से आने वाली नमी से भरी मानसूनी हवाओं को आकर्षित किया है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर बादल बनने लगे हैं।

जुलाई की शुरुआत में कमजोर पड़ गया था मानसून

इससे पहले जुलाई के शुरुआती दिनों में देश के कई हिस्सों में मानसून काफी सक्रिय था। महाराष्ट्र, दिल्ली समेत कई राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन इसके बाद मानसून ट्रफ के हिमालय की तराई की ओर खिसक जाने से मैदानी क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गई थीं। मध्य भारत के ऊपर बने विपरीत हवाओं के दबाव ने भी हिंद और अरब महासागर से आने वाली नमी वाली हवाओं के प्रवाह को प्रभावित किया था। इसके चलते कई इलाकों में बारिश का दौर अचानक थम गया था।

अब बंगाल की खाड़ी में बने नए मौसम तंत्र के कारण मानसून की गतिविधियां फिर तेज हो गई हैं और देश के बड़े हिस्से में बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं।

कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र अगले 12 घंटों में और मजबूत हो सकता है। इसके प्रभाव से 26 और 27 जुलाई को ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मूसलाधार से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी तेज बारिश हो सकती है।

ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों में मौसम खराब रहने के साथ करीब 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। ऐसे में समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों और मछुआरों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

क्या होती है ‘रेन बेल्ट’?

मौसम विज्ञान में ‘रेन बेल्ट’ बादलों और बारिश का एक लंबा क्षेत्र होता है, जो मानसूनी हवाओं, वायुमंडलीय दबाव और मानसून कन्वर्जेंस जोन की वजह से सैकड़ों से लेकर हजारों किलोमीटर तक फैल सकता है। जब यह बेल्ट सक्रिय होती है तो इसके रास्ते में आने वाले बड़े भौगोलिक क्षेत्र में एक साथ भारी बारिश की स्थिति बन सकती है।

मौजूदा स्थिति में उत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत और आगे दक्षिण कोरिया तक बादलों की लंबी पट्टी बनने को मानसून की व्यापक सक्रियता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए अगले कुछ दिनों में कई राज्यों में बारिश का असर और तेज होने की संभावना है।