डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष पर की गई हालिया टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने पलटवार किया है। प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे संबोधनों पर प्रतिक्रिया देते हुए चिदंबरम ने कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर खुशी और गर्व है।
चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि वे स्वयं को कवि बताते हैं और अक्सर नए नारे तथा शब्द गढ़ते हैं। उन्होंने कहा, “मैं खुश हूं कि मैं बेवकूफ नक्सल नहीं हूं। मैं खुश हूं कि मैं दिमागी नक्सल हूं।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गुजराती में कविताएं लिखते हैं और संभवत: इन्हीं से नए शब्द और अभिव्यक्तियां गढ़कर उनका अंग्रेजी में अनुवाद करते हैं। चिदंबरम के मुताबिक, पिछले करीब 12 वर्षों में प्रधानमंत्री ने कई नारे और राजनीतिक अभिव्यक्तियां गढ़ी हैं। उन्होंने ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ से लेकर हाल के ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे शब्दों का उल्लेख किया।
‘नाराज फूफा’ पर भी साधा निशाना
चिदंबरम ने ‘नाराज फूफा’ टिप्पणी को भी अर्थहीन बताया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर इन शब्दों को लेकर बड़ी संख्या में मीम बनाए जा रहे हैं, खासकर जेन-जी के बीच इनकी चर्चा है।
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है, तो उनके पोस्ट को लाखों लाइक्स मिले। चिदंबरम ने कहा कि इससे यह संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में लोग भी इस टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं।
स्वतंत्रता दिवस के संबोधन का किया जिक्र
चिदंबरम की यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से दिए गए संबोधन के बाद आई है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में देशवासियों और प्रशासन से ‘दिमागी नक्सल’ अथवा वैचारिक नक्सली सोच रखने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की अपील की थी।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि वर्ष 2014 के बाद सरकार की कार्रवाई से जंगलों में चल रहा सशस्त्र नक्सली विद्रोह काफी हद तक समाप्त हुआ है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संस्थानों में वैचारिक नक्सली सोच अब भी मौजूद है और इसका प्रभाव देश के युवाओं पर नहीं पड़ने दिया जाना चाहिए।
डबल-स्टैक मालगाड़ी को लेकर भी ‘नाराज फूफा’ पर तंज
इससे पहले मंगलवार को वडोदरा में ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष के आलोचकों पर ‘नाराज फूफा’ टिप्पणी के जरिए निशाना साधा था।
प्रधानमंत्री ने मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से वडोदरा के बीच डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी चलाए जाने का उदाहरण देते हुए कहा था कि एक ही यात्रा में इतनी मात्रा में माल पहुंचाया गया, जितना 250 से अधिक ट्रकों के जरिए ले जाया जा सकता था। इसी संदर्भ में उन्होंने उन आलोचकों पर तंज कसा जो हर नई पहल पर सवाल उठाते हैं।
प्रधानमंत्री इससे पहले श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में भी ‘नाराज फूफा’ शब्द का इस्तेमाल कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने बुलेट ट्रेन, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा और यूपीआई जैसी पहलों का विरोध करने वाले आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा था कि देश के विकास के लिए जरूरी कदमों को कोई रोक नहीं सकता।








