डेस्क : भारत का गेहूं एक बार फिर वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने लगा है। निर्यात प्रतिबंधों में ढील के बाद बांग्लादेशी आयातकों ने भारत से 2 लाख टन से अधिक गेहूं खरीदने के सौदे किए हैं। वर्ष 2022 के बाद यह भारत से बांग्लादेश की पहली बड़ी गेहूं खरीद मानी जा रही है।
काला सागर क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित
भारत की ओर बांग्लादेश के रुख का प्रमुख कारण काला सागर क्षेत्र से गेहूं की आपूर्ति में आई बाधा और वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण इस क्षेत्र से अनाज की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे एशिया समेत कई देशों को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही है।
बांग्लादेश को हर साल 70 लाख टन से अधिक गेहूं आयात करना पड़ता है। वर्ष 2022 में भारत द्वारा गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने से पहले बांग्लादेश की करीब 70 प्रतिशत गेहूं जरूरत भारत से पूरी होती थी। इसके बाद उसने अर्जेंटीना, कनाडा, रूस और यूक्रेन जैसे देशों से आयात बढ़ाया।
भारत से गेहूं पड़ रहा सस्ता
बांग्लादेश को भारत से मिलने वाले गेहूं की कीमत करीब 305 से 326 डॉलर प्रति टन रहने की उम्मीद है। ज्यादातर गेहूं रेल मार्ग से बांग्लादेश पहुंचाया जाएगा। इसके मुकाबले ऑस्ट्रेलिया से गेहूं की कीमत काफी अधिक हो गई है। बांग्लादेश में पिछले एक महीने के दौरान गेहूं के आटे की कीमत में करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
2026-27 में निर्यात बढ़ने का अनुमान
भारत ने मई 2022 में घरेलू कीमतों और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के चलते गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। वर्ष 2026 में सरकार ने सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति देना शुरू किया और अगस्त में निर्यात नीति में बदलाव किया गया।
अमेरिकी कृषि विभाग की विदेशी कृषि सेवा के अनुमान के अनुसार, 2026-27 में भारत का गेहूं निर्यात बढ़कर करीब 20 लाख टन हो सकता है। बांग्लादेश और नेपाल को निर्यात में बढ़ोतरी के साथ संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देशों से भी भारतीय गेहूं की मांग बढ़ने की संभावना जताई गई है।
श्रीलंका के आयातकों ने भी हाल में भारत से करीब 60 हजार टन गेहूं खरीदा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि क्षेत्रीय बाजारों में भारतीय गेहूं की मांग फिर बढ़ रही है।








