डेस्क : पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी के आंदोलन को अब किसान संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचने और सांकेतिक उपवास करने का ऐलान किया है। उन्होंने अपने समर्थकों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
सीजेपी प्रवक्ता दीपक बालयान के मुताबिक, ‘देश बचाओ मोर्चा’ के तहत भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध कर रहे किसानों ने भी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने का फैसला किया है। इससे पहले किसान नेता राकेश टिकैत भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर चुके हैं। टिकैत ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भी मुलाकात की थी।
इसी बीच, सोनम वांगचुक ने 26 दिनों से जारी अपना अनशन समाप्त कर दिया है। केंद्र सरकार की ओर से उनकी तीन मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने अनशन खत्म किया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अस्पताल पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की।
जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन करीब एक महीने से जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा में पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने, दोषियों की जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्षी दल भी लगातार केंद्र सरकार को घेरते रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ रहा है और सरकार को इस पर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई का भरोसा जताया है। सरकार की ओर से ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट और पेपर लीक के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधानों की बात कही गई है।
किसानों के आंदोलन से जुड़ने के बाद पेपर लीक के खिलाफ चल रहे इस प्रदर्शन को राजनीतिक तौर पर भी नई धार मिलने के संकेत हैं। आने वाले दिनों में किसान संगठनों और छात्र समूहों के बीच बढ़ता तालमेल सरकार के लिए नई चुनौती बन सकता है।









