नई दिल्ली : भारत का फोटोनिक्स उद्योग तेजी से विस्तार की दिशा में बढ़ रहा है। देश में जल्द ही उद्योग के नेतृत्व में सिलिकॉन फोटोनिक्स के कम से कम एक-दो पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने की उम्मीद है। यह जानकारी इंडिया फोटोनिक्स एसोसिएशन (आईपीए) के महानिदेशक अश्विनी अग्रवाल ने बुधवार को दी।
इंडिया फोटोनिक्स एसोसिएशन के शुभारंभ के अवसर पर समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में अग्रवाल ने कहा कि देश में फोटोनिक्स क्षेत्र फिलहाल तेजी से विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग के नेतृत्व में शुरू होने वाले पायलट प्रोजेक्ट भारत में फोटोनिक्स क्षेत्र को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सेमीकंडक्टर कार्यक्रम से निवेश को मिलेगा बढ़ावा
अग्रवाल ने कहा कि सरकार के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम से फोटोनिक्स क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार ने इसके लिए करीब एक लाख 27 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो मौजूदा विनिमय दर के आधार पर लगभग 14 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर है। इससे करीब 40 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि सेमीकॉन 2.0 के तहत सिलिकॉन फोटोनिक्स को पहले की तुलना में अधिक महत्व दिया गया है। इसमें मुख्यधारा की परियोजनाओं के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के तहत सिलिकॉन फोटोनिक्स फैब की व्यवस्था भी की गई है।
स्वदेशी तकनीक पर जोर
अग्रवाल ने कहा कि भारत को फोटोनिक्स के क्षेत्र में अपनी घरेलू क्षमता विकसित करने के लिए उद्योग के स्तर पर एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। इसके लिए घरेलू मांग को एकत्रित करने, बाजार को मजबूत रखने और स्वदेशी तकनीकों में निवेश बढ़ाने पर जोर देना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत को विदेशों से उपलब्ध तकनीकों का लाभ उठाते हुए उन्हें देश की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना चाहिए। ऐसी तकनीकों पर ध्यान देना होगा जो विश्वसनीय हों, भारत की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करें और देश को अपनी तकनीकी राह बनाने में सक्षम बनाएं।
फोटोनिक्स उद्योग के लिए स्वतंत्र संस्था का शुभारंभ
भारत ने बुधवार को देश के पहले स्वतंत्र और उद्योग-आधारित फोटोनिक्स संगठन इंडिया फोटोनिक्स एसोसिएशन (आईपीए) का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य फोटोनिक्स क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना, उद्योगों के बीच सहयोग मजबूत करना और इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को विकसित करना है।
आईपीए उद्योग और विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग के लिए एक तटस्थ मंच के रूप में काम करेगा। संगठन तकनीकी रूप से मजबूत और उद्योग की वास्तविक जरूरतों पर आधारित सुझावों के माध्यम से नीति निर्माण में सहयोग करेगा। साथ ही, इसका लक्ष्य वैश्विक फोटोनिक्स क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत करना भी है।








